Saturday, 29 April 2023

शिव खेड़ा लिखते हैं- 

जिंदगी एक कैफेटेरिया की तरह है. अपनी प्लेट लो, पसंद का खाना डालो और बिल चुकाओ. अगर आप पैसे देने को तैयार हैं तो वहां आपकी पसंद की कोई भी चीज मिल सकती है. किसी कैफेटेरिया में अगर आप इस बात का इंतजार करें कि वेटर आकर आपसे कुछ खाने को पूछेगा तो आप इंतजार ही करते रह जाएंगे. जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है. आप चुनाव करते जाइए और कीमत चुकाते जाइए.

No comments:

Post a Comment

कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...