जिंदगी एक कैफेटेरिया की तरह है. अपनी प्लेट लो, पसंद का खाना डालो और बिल चुकाओ. अगर आप पैसे देने को तैयार हैं तो वहां आपकी पसंद की कोई भी चीज मिल सकती है. किसी कैफेटेरिया में अगर आप इस बात का इंतजार करें कि वेटर आकर आपसे कुछ खाने को पूछेगा तो आप इंतजार ही करते रह जाएंगे. जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है. आप चुनाव करते जाइए और कीमत चुकाते जाइए.
हमारी खुशी की कुंजी हमारे पास ही है. हमारी समस्याओं का समाधान हमारे पास ही है. इसके लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है बल्कि खुद से खुद की पहचान कराने की जरूरत है. अपने अंदर और बाहर के तार को जोड़ने की जरूरत है. आइए Happy Science के जरिए मिलकर रास्तों को तय करते हैं, मुश्किलों को आसान बनाते हैं.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...
-
हम इंसान अक्सर जीवन में नयापन की तलाश में लगे रहते हैं. इस दौरान हम कई चीजों से होकर गुजरते हैं. कुछ चीजें और आदतें हमारे साथ हो लेती हैं और...
-
बड़े विद्वान कह गए हैं- 'वाणी चांदी है, मौन स्वर्ण है'. जीवन में इसका संतुलन न केवल आपके मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जर...
-
एक जापानी कहावत है- हरा हाची बुन मी... यानी तब तक खाओ जब तक कि आपका पेट 80 प्रतिशत भरा न हो. जापानी मानते हैं कि ये मंत्र है मानसिक और शारीर...

No comments:
Post a Comment