'हम बहुत देर तक पीछे मुड़कर नहीं देखते. हम आगे बढ़ते रहते हैं, नए दरवाजे खोलते हैं, और नई चीजें करते हैं, क्योंकि हम जिज्ञासु होते हैं.. और जिज्ञासा हमें नए रास्तों पर ले जाती है.'
-वॉल्ट डिज्नी
हमारी खुशी की कुंजी हमारे पास ही है. हमारी समस्याओं का समाधान हमारे पास ही है. इसके लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है बल्कि खुद से खुद की पहचान कराने की जरूरत है. अपने अंदर और बाहर के तार को जोड़ने की जरूरत है. आइए Happy Science के जरिए मिलकर रास्तों को तय करते हैं, मुश्किलों को आसान बनाते हैं.
कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...
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