Tuesday, 7 January 2025

विचारों का हमारे जीवन में क्या महत्व है?

तमाम जीवों में मनुष्य विशेष रूप से मन प्रधान जीव है. वह जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है. हम इंसान बाकी जीवों से अलग हैं सिर्फ अपने मस्तिष्क के कारण, अपने मन के कारण और अपनी सोचने-समझने की क्षमता के कारण...  क्योंकि हमारे विचार ही हमें डिफाइन करते हैं, हमारी पर्सनैलिटी को हमारे आसपास तैर रहे विचार ही गढ़ते हैं.

इसीलिए सिगमंड फ्रायड कहते थे- मनुष्य तब तक शक्तिशाली होता है जब तक वह किसी मज़बूत विचार का प्रतिनिधित्व करता है. इतिहास गवाह है कि दुनिया का हर सशक्त इंसान अपनी सही ताकत तभी पहचानता है जब वो अपने विचारों को मजबूत करता है. राम अपनी मर्यादा, करुणा, दया, और धर्मपरायणता, तो बुद्ध त्याग के विचार से, गांधी सत्य और अहिंसा के विचार से तो विवेकानंद धर्म के ज्ञान और तप से खुद को दुनिया में सबसे अलग खड़ा कर पाए...

अगर हम गौर करें तो पाएंगे कि हमारे भी जीवन पर उन विचारों का सीधा असर दिखता है जिनका हमें रोज समना करना होता है. मसलन हम जिनके बीच रहते हैं उनके विचार क्या हैं, हम क्या खाते हैं, हम क्या देखते-सुनते और बोलते हैं, हम क्या पढ़ते हैं? ये सारी चीजें हमें गढ़ रही होती हैं. विचार के रूप में और व्यक्तित्व के रूप में भी.

इसीलिए अरस्तु ने इंसान को सामाजिक जीव बोला है तो सिगमंड फ्रायड ने मानसिक जीव. भगवद्गीता में भी कहा गया है कि इंद्रियों के अधीन होने से मनुष्य के जीवन में विकार और परेशानियां आती हैं और जो अपने मन को सभी विकारों से मुक्त कराते चला जाता है वह निर्भय होते चला जाता है.

यही मन का विज्ञान है. हमारे मन की ताकत और हमारे विचार ही हमें बुलंदियों की ओर लेकर जाते हैं. इसलिए जैसे हम अच्छे स्वास्थ्य के लिए खाना और व्यायाम पर फोकस करते हैं वैसे ही हमें अपने मन को भी मजबूत करने के लिए लगातार ज्ञान और अच्छे विचारों की खुराक देने की जरूरत होती है.

कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...