किसी ने सच ही कहा है कि- अगर आप हमेशा परेशान रहते हैं तो इसका मतलब है कि आपके जीवन जीने के तरीके में जरूर कोई न कोई फॉल्ट है...
काम की मजबूरी, भागमभाग की जिंदगी, परिवार में तनाव, पारिवारिक झगड़े, डिप्रेशन, एंजाइटी, नशा... आज के आधुनिक जीवन की वो सच्चाइयां हैं जिन्हें इंसान ने अपने ऊपर इस हद तक ओढ़ लिया है कि कभी-कभी लगता है कि इनसे छुटकारा ही संभव नहीं है. लेकिन क्या यही जीवन का आखिरी सच है? या आपके पास कुछ ऐसा है जिसे आप एक्सप्लोर नहीं कर पा रहे हैं? कुछ ऐसा जो आपकी खुशियों और आपके बीच पर्दा डाले हुए है और आप उन तक पहुंच नहीं पा रहे हैं?
आज बिजी जिंदगी जी रहे इंसान के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि आनंद की तलाश कहां करें? आनंद के लिए किसके पास जाएं. क्या कोई और इंसान आपको आनंद तक पहुंचा सकता है या कोई जगह-कोई चीज आपको आनंद दे सकती है?
दरअसल, एक खुशहाल जिंदगी के लिए हमें ये बात समझनी होगी कि हमारी खुशियों की कुंजी हमारे पास ही है. खुशियों के लिए हमें सबसे पहले खुद के पास जाने की जरूरत है, खुद से जुड़ने की जरूरत है. दूसरे शब्दों में कहें तो बैक टू बेसिक का फॉर्मूला ही हमें खुशियों तक या आध्यात्मिक भाषा में कहें तो आनंद तक पहुंचा सकता है.
अगर आप खुद को, खुद के समय को, खुद के मन को और खुद के मस्तिष्क को पहले मैनेज करना सीख जाएं तो समस्याएं भी मैनेज होने लगेंगी. आपको इसमें मजा भी आने लगेगा लेकिन इसका एक प्रोसेस है जिसके लिए रोज आपको कुछ समय अपने लिए निकालना होगा. आप सोच रहे होंगे कि खुद के लिए क्या समय निकालना? सारा समय मेरा ही तो है. लेकिन ऐसा नहीं है. आप अपने रोज के समय को गौर करके देखें कि कितना समय आप खुद के ऊपर दे पाते हैं?
सबसे पहले खुद के लिए एकांत का एक समय निकालें. रोज सुबह या शाम सिर्फ 15 मिनट. जिसमें आप देखें कि आज का दिन कैसा गया. सबसे ज्यादा खुशी आपको आज किस काम को करके आया. अपने साथ-साथ रोज शाम अपने परिवार के हर सदस्य से ये सवाल भी पूछें कि आज का सबसे मजेदार मोमेंट तुम्हारा क्या रहा? देखिए जवाब से कैसी मैजिकल फीलिंग आपको आती है. इससे आपके परिवार के लोगों को भी लगेगा कि आप उनकी खुशियों की परवाह करते हैं.
आप कोई भी काम करते हों. हफ्ते में एक दिन सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिए निकालिए. अपने शहर की उन जगहों की लिस्ट बनाइए जहां आप शांति के साथ और कम खर्च में और प्राकृतिक नजारों के बीच अपना पूरा दिन बिता सकते हैं. वहां जाइए, शांति से बैठिए, परिवार के साथ बातें कीजिए, बच्चों के साथ बिल्कुल बच्चे बनकर एंजॉय कीजिए. उनके खेल में शामिल होइए...उनके साथ शांत वातावरण में बैठकर खाना खाइए.
यकीन मानिए आपमें नई ऊर्जा का संचार होने लगेगा. कुछ दिनों में सिर्फ आपको ही नहीं आपकी पूरी फैमिली को इस तरह के वीकेंड का इंतजार रहने लगेगा. हफ्ते में सिर्फ एक दिन का मैजिक न सिर्फ आपकी जिंदगी बल्कि चीजों को, और समस्याओं को देखने का आपका नजरिया भी बदल देगा.
ये प्रयोग करके देखिए. आपको आनंद की तलाश में कहीं भटकना नहीं होगा. आपके आसपास के माहौल में ही आनंद उतरता दिखेगा. ये प्रयोग शुरुआत में बस चार हफ्तों के लिए करके देखें... आप अपने और अपने परिवार के लिए मैजिकल सैटरडे, मैजिकल संडे, मैजिकल मंडे... जो भी आपके लिए संभव हो क्रिएट कर सकते हो. उस दिन को सिर्फ खुशियों के लिए डेडिकेट करके देखिए.
हमें ये सत्य समझना होगा कि जीवन बड़ा अमूल्य है. इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब हम जीवन जीने की कला को समझें. अध्यात्म को अपना दोस्त बनाइए. अध्यात्म का मतलब वो थिंकिंग जो आपको आपसे जोड़े. यह जीवन जीने की कला सिखाता है. जिन्होंने इसका महत्व समझ लिया उनके लिए यह एक दिव्य विधा है. यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है.

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