जीवन एक किताब की तरह है, इसके एक पन्ने पर दुख है, पीड़ा है तो दूसरे पन्ने पर खुशी और आनंद, इसके तीसरे पन्ने पर समस्याएं-चुनौतियां हैं, तो चौथे पन्ने पर उत्साह है-आशा है...ऐसे ही अनगिनत पन्ने हैं इस किताब में. अगर आप एक ही पन्ने पर अटके रह गए तो जीवन उसी हालात में अटकी रह जाएगी... अगर हर तरह के जीवन का आनंद लेना है तो पन्ने पलटते रहिए, यानी बदलावों को अपनाते रहिए... सच कहा जाए तो परिवर्तन ही जीवन का सार है...
किसी ने ठीक ही लिखा है- 'अपनी कहानी का इकलौता गवाह हूं मैं, सिर्फ मुझे पता है कि किस-किस दौर से गुजरा हूं मैं.'
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