Friday, 7 October 2022

सफल होना है तो तपना तो होगा...


याद रखना अगर कामयाबी हासिल करनी है तो तपना तो होगा ही. एक कहानी सुनाता हूं. पुरानी है लेकिन बहुत काम की है-

एक मूर्तिकार को मूर्ति बनाने का ऑर्डर मिला. नदी किनारे से वह दो पत्थरों को उठा लाया. पहले पत्थर को तराशने के लिए जैसे ही उसने हथौड़ी-छेनी से पहला वार किया. पत्थर से आवाज आई- रोको. बहुत दर्द हो रहा है. छोड़ दो मुझे. मूर्तिकार ने छोड़ दिया.

मूर्तिकार ने दूसरे पत्थर को उठाया और लग गया काम पर. कुछ देर काम करने के बाद उसे याद आया तो उसने पत्थर से पूछा- क्या तुम्हें हथौड़ी-छेनी के चोट से दर्द नहीं हो रहा. पत्थर से आवाज आई- दर्द तो बहुत हो रहा है लेकिन कोई बात नहीं. जरूरी है. मूर्तिकार अपने काम में लग गया और उसे एक भगवान की सुंदर मूर्ति में बदल दिया.

अगले दिन मंदिर से एक आदमी आया और उस मूर्ति को ले जाने लगा. तभी उसकी नजर पास पड़े दूसरे पत्थर पर पड़ी. वो बोला कि क्या मैं इस मूर्ति के साथ इस पत्थर को भी ले जा सकता हूं. मूर्तिकार बोला- हां, मेरे का तो है नहीं. ले जाइए.

मूर्ति और पत्थर दोनों मंदिर में पहुंचे. मूर्ति पूरे सम्मान के साथ स्थापित हो गई जिसे रोज लोग पूजने आते थे. दूसरी पत्थर वहीं नारियल फोड़ने के लिए लगा दी गई. लोग आते एक को पूजते, दूसरे पर नारियल फोड़ते. जिसने खुद को खपाया और जिसने खुद को तपने से बचा लिया उन दोनों पत्थरों की नियति में फर्क साफ हो गया था.

इसलिए कहा जाता है कि कुछ बनना है तो तपना तो होगा. इसलिए जीवन में कभी संघर्षों से मत भागो.

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