Friday, 7 October 2022

आपकी लड़ाई खुद आप से है...

...जब भी बिखरा हूं

दूगनी रफ्तार से निखरा हूं

वक्त से सीखी है मैंने

वक्त की धार को अपनी ताकत बनाना...

ओशो कहते हैं- जीवन में अधिकांश दुखों का कारण ही है कि इंसान खुशी की तलाश खुद से बाहर करता है. अर्थात दूसरों में. दूसरों से उम्मीदें पालता है और फिर जब ये उम्मीदें टूटती हैं तो दुखों से घिर जाता है.

अर्थात, खुशी की तलाश खुद में करनी है. खुद से प्यार करना सीखना है. अगर जग को जीतना है, आनंद को पाना है तो सबसे पहले अपने अंदर झांकना होगा. बदलावों की शुरुआत खुद से करनी होगी... और कहते हैं न कि आपका जीवन वहां से शुरू होता है जहां से आपका डर समाप्त हो जाता है.

आपकी लड़ाई खुद से है. किसी और तुलना में न तो अपना वक्त बर्बाद करें और न ही किसी और को सफाई देने में अपनी एनर्जी लगाएं. ओशो कहते हैं कि आप लोगों को सफाई देने में और अपनी स्थिति स्पष्ट करने में अपना समय बर्बाद न करें क्योंकि लोग वही सुनते हैं जो सुनना चाहते हैं.

आपको किसी के साथ किसी भी तरह की प्रतियोगिता करने की जरूरत नहीं है, आप जैसे भी हैं अच्छे हैं. खुद को स्वीकार कीजिए और प्रगति के लिए खुद पर मेहनत करना शुरू कर दीजिए. आपकी उम्र क्या है, आपकी आर्थिक स्थिति क्या है ये मायने नहीं रखता. आपको क्या हासिल करना है ये मायने रखता है. उसपर फोकस कीजिए बाकी चीजें मायने नहीं रखतीं.

सीखने का प्रोसेस भी यही है कि खूब प्रयास करो, खूब गलतियां करो. बस एक बात हमेशा याद रखना कि दोबारा से वही गलती कभी मत करना और फिर देखना तुम कामयाबी की ओर बढ़ रहे होगे. अगर आप सत्य के साथ हैं और आपने यह निर्णय कर लिया है तो याद रखना इस दुनिया में सबसे बड़ी ताकत यानी परमात्मा का साथ तुम्हारे साथ है और आप अकेले नहीं हो.

महात्मा बुद्ध कहते हैं- मनुष्य के दुखों का कारण ही है दूसरों के जीवन से तुलना. आपको अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो खुद पर फोकस करो. खुद पर काम करो. गौतम को बुद्ध बनना था तो गौतम ने पूरी सेना लेकर कूच नहीं किया. एकान्त में राजपाठ छोड़कर खुद को जीतने निकल पड़े. एकान्त में सालों तक खुद पर काम किया और बुद्धत्व को प्राप्त किया.

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