पहला किस्सा-
एक भिखारी चौराहे पर कलम से भरा एक कटोरा लेकर बैठा हुआ था और आने-जाने वालों से कुछ पैसे देने की गुहार लगा रहा था. एक नौजवान बिजनेसमैन वहां से गुजरा. उस नौजवान ने कटोरे में कुछ पैसे डाले और आगे बढ़ गया. कुछ कदम आगे चलकर वह वापस आया और कटोरे में से कुछ कलम उठाते हुए बोला- इसकी कीमत है...ठीक. आखिरकार तुम भी एक बिजनेसमैन हो और मैं भी. फिर वह चला गया.
एक साल बाद वह नौजवान बिजनेसमैन एक पार्टी में गया. वह भिखारी भी वहां सूट-टाई लगाए आया था. नौजवान बिजनेसमैन को पहचानकर वह भिखारी उसके पास गया और बोला- आप शायद मुझे नहीं पहचानते लेकिन मैं आपको जानता हूं और कभी भूल नहीं सकता. उसने एक साल पहले की पूरी कहानी उसे याद दिलाई. नौजवान ने कहा- अब जब तुमने याद दिलाया तो मुझे याद आया कि तुम तो एक भिखारी थे न, यहां पार्टी में सूट-बूट में क्या कर रहे हो.
भिखारी ने कहा- आप शायद नहीं जानते कि आपने मेरे लिए उस दिन क्या किया? मेरी जिंदगी में आप शायद वो पहले इंसान थे जिसने मेरा स्वाभिमान वापस लौटा दिया. आपने मेरे कटोरे से कुछ पेन उठाकर पैसे दिए और कहा कि तुम भी बिजनेसमैन हो और मैं भी. आपके जाने के बाद मैं काफी देर तक अपने बारे में सोचता रहा कि मैं यहां क्या कर रहा हूं. मैं भीख क्यों मांग रहा हूं? तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब मैं भीख नहीं मागूंगा और कुछ बनकर दिखाऊंगा. मैंने अपना झोला बंद किया और काम करना शुरू किया और आज जो भी हूं आपके सामने हूं.
मैं सिर्फ आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि आपने मुझे मेरा खोया हुआ स्वाभिमान वापस लौटा दिया. उस घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी. यहां उस नौजवान बिजनेसमैन के कुछ शब्दों ने उस भिखारी का परिचय उसे खुद से करा दिया. वह खुद सोचता रहा, खुद के नए विचारों से प्रेरित हुआ और फिर अपनी जिंदगी बदलने की राह पर चल पड़ा. जब वह फैसला करके आगे बढ़ गया तो फिर बदलाव भला कौन रोक सकता था.
दूसरी कहानी-
दूसरी कहानी नजरिये की है. एक ही स्थिति दो लोगों के सामने होती है. एक समान हालात को कौन किस नजरिये से देखता है उसकी आगे की जिंदगी उसी के मुताबिक होती है. ये दो भाइयों की कहानी है जिनका पालन-पोषण एक ही माहौल में हुआ था लेकिन दोनों की जिंदगी में बहुत बड़ा फर्क था. इनमें से एक भाई नशे और शराब का आदी था जो अक्सर अपने परिवार वालों को मारता-पीटता था. जबकि दूसरा भाई एक कामयाब बिजनेसमैन था. समाज में उसकी इज्जत थी. उसका परिवार भी बेहद खुशहाल और संपन्न था. लोग जानना चाहते थे कि एक ही मां-बाप की संतान होने और एक ही माहौल में पलने के बावजूद इन दोनों भाइयों के स्वभाव में इतना फर्क क्यों था?
पहले भाई से लोगों ने ये बात पूछी- तुम ऐसे काम क्यों करते हो? नशे के आदी हो और शराब पीते हो. परिवार वालों को पीटते हो. इसकी प्रेरणा तुम्हें कहां से मिलती है? उसने जवाब दिया- मेरे बाप से. मेरा बाप नशेबाज है, शराबी है और परिवार वालों को पीटता है. मैंने बचपन से यही देखा है. ऐसे हालात में आप मुझसे और क्या उम्मीद करते हैं. यही तो मैं हूं.
लोग अब दूसरे भाई के पास पहुंचे. उससे भी वही सवाल पूछा और कहा- आप हर काम सही कैसे कर रहे हैं? आपको यह प्रेरणा कहां से मिलती है? सोचिए उसने क्या जवाब दिया. ''मेरे बाप से, मैं जब छोटा था और अपने बाप को शराब पीकर हर गलत काम करते, मारते-पीटते देखता था तभी मैंने फैसला कर लिया था कि मैं ऐसा नहीं बनूंगा,''
दोनो भाई अपनी शक्ति और प्रेरणा एक ही जगह से पा रहे थे. लेकिन एक ने गलत रूप में अपनाया और दूसरे ने सबक के रूप में. बस यहीं से जिंदगी में फर्क आना शुरू हो गया. आप खुद तय कर सकते हैं आप अपने जीवन में कौन सा नजरिया अपनाना चाहेंगे?
No comments:
Post a Comment