Sunday, 9 April 2023

जो आपकी रफ्तार रोकें... उन बंधनों को तोड़ना क्यों जरूरी?

पुराने समय से ऋषि-मुनि कहते आए हैं कि आपके कर्म ही आपके जीवन का आईना हैं. यानी आप जो बोओगे वही काटोगे. जिंदगी में आप वही पाते हो, जैसी आपकी इनर वाइब्रेशंस हैं, यानी जैसे आप भीतर से हैं. इसके लिए जरूरी है कि आप खुद की समीक्षा करें, अपने अंदर एक उदार, एक शांत चित्त को विकसित करें और यह तभी हो सकेगा जब आपका मन एकदम नदी के जल सा निर्मल हो जाए.


अब सवाल उठता है कि निर्मल आनंद के इस मार्ग तक खुद को कैसे लाया जाए?

ओशो कहते थे- जीवन की एकमात्र कसौटी है आनंद. जिस जीवन को आप जी रहे हैं, उसमें अगर आनंद नहीं आ रहा है, तो जान जाना चाहिए कि आप गलत जी रहे हैं. कुछ तो फॉल्ट है आपके जीवन जीने के तरीके में. दुख गलत होने का सबूत है और आनंद ठीक होने का. इसलिए जीवन का उत्सव मनाओ. खुद को प्रेम और करुणा से भर दो और दूसरों को भी ऐसा होने में मदद करो. खुद का विस्तार करो. सभी बेजान चीजों, जीवों और कुदरत के प्रति संवेदनशील बनो. हमेशा अहोभाव में रहो, कृतज्ञता और धन्यवाद से भरे रहो.

बाहरी मन की पकड़ से परे ताकतें तय करती हैं कि जिंदगी में किस-किससे हम मिलेंगे, वे हम पर क्या असर डालेंगे? जिंदगी हमें वही देती है, जिसे सीखने की हमें जरूरत होती है और कभी-कभी यह सीखना दुख के जरिए होता है.

पारिवारिक जीवन और रिश्तों के जाल के बीच भी खुद को शांत बनाए रखने का तरीका क्या है? इसके लिए सबसे पहला काम है रिश्तों में अपेक्षाएं मत रखो. अपना सर्वश्रेष्ठ दो, नतीजे की चिंता किए बगैर. अतीत की मान्यताओं, संस्कारों, आदतों और नियमों से बाहर निकलो. अतीत से बंधे हुए मन से मुक्ति जरूरी है.

जीवन में होश सबसे जरूरी है. अगर होश से फैसले करेंगे, तो हमेशा आनंद में रहेंगे. हर लम्हा होश, प्रेम और आनंद से भरपूर होना चाहिए. याद रखें कि मौजूदा लम्हा ही सबसे अहम है. जीवन को समग्रता से जिओ, पूरी तरह डूब कर. हम आधा-अधूरा जीते हैं. अभी और यहां जिओ. छोटी-छोटी चीजों में जागरूक होकर देखो. छोटे-छोटे काम होश में रहकर करो.

आपको एक बात याद रखनी है कि हालात कैसे भी हों आपका काम सबसे पहले खुद को खुश रखना है बाकी चीजें आपके लिए बाद में मायने रखेंगी. आपकी खुशी आपके लिए सबसे अधिक मायने रखनी चाहिए.

इसका तरीका है खुद के विकास पर लगातार काम करें. जहां से मिले ज्ञान सीखने की कोशिश करें. उम्र कोई भी हो... जिंदगी बदली जा सकती है इसलिए कोई भी उम्र हो हारकर मत बैठो. मन को जितना सरल बना सको बनाओ, समाज का बोझ ले कर मत चलो.

क्योंकि एक विमान को भी उड़ान भरने के लिए पहले बोझ हल्का करना पड़ता है. यही कारण है कि विमानों में यात्रा करने वालों के पास मौजूद सामान का वजन निश्चित होता है. सरल, सहृदय और शांत चित्त ही एक आनंदित जीवन की ओर बढ़ने का पहला चरण है...बस आपको इसी दिशा में शुरुआत करनी है, फिर एक-एक प्रतिशत करके आपका जीवन खुद बदलते चला जाएगा.

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