Sunday, 11 June 2023

अक्लमंद इंसान हर जंग नहीं लड़ता...

 


जीवन में आप क्या हासिल करना चाहते हैं ये जितना अहम है उतना ही अहम ये भी है कि आप उसे हासिल करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं. आपके इस सफर में मुश्किलें तमाम आएंगी. लेकिन कौन लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा इसी हालात में पता चलेगा. कई बार ऐसे मौके भी आएंगे जो आपको दूसरी दिशा में उलझा सकते हैं लेकिन यहीं अक्लमंद आदमी की पहचान होती है.

अक्लमंद आदमी हर जंग नहीं लड़ता. कई बार लोग आपकी चुप्पी को कमजोरी समझ सकते हैं लेकिन यहीं आपको अपनी प्राथमिकताएं तय करनी हैं, बाधाओं को न बढ़ाते हुए अगर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है तो आपको स्मार्टली पिक करना है कि किस जगह आपको साइलेंट रहना है, किस जगह हार जाना है और किस जगह अड़ जाना है.

अगर आप हर जंग को अपनी आन का मुद्दा बनाने लगे तो आपको सड़क चलते रोजाना ऐसे लोग मिल जाएंगे जिनसे झगड़े में उलझे ही रह जाएंगे. ऐसे हालात में शांत बने रहें, अपने लक्ष्य पर फोकस करके काम करते जाएं ताकि आपके लिए सिर्फ आपके लक्ष्य मायनें रखें. आप खुद पर काम करते जाएं और अपने तय किए हुए लक्ष्य की ओर बढ़ते जाएं. वक्त आएगा तो सब हैरान होंगे कि आपकी शांति का राज क्या था?

आप खुद को कभी भी दूसरों की गलतियों या खुद के क्रोध रूपी कमजोरी का शिकार मत बनने दें. कई बार क्रोध की वजह से काम बिगड़ जाते हैं, रिश्तों में तनाव बढ़ जाता है. इसीलिए क्रोध से बचना चाहिए.

इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है.

पुराने समय में एक सेठ के पास संत भिक्षा मांगने पहुंचे. सेठ भी धार्मिक स्वभाव का था. उसने संत को दान दिया. सेठ ने संत से कहा कि गुरुजी मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं.

संत ने कहा कि ठीक है पूछो, क्या पूछना चाहते हो? सेठ ने पूछा कि गुरुजी मैं ये जानना चाहता हूं कि लोग लड़ाई-झगड़ा क्यों करते हैं? संत ने कहा कि मैं यहां भिक्षा लेने आया हूं, तुम्हारे मूर्खतापूर्ण सवालों के जवाब देने नहीं आया.

संत के मुंह से ऐसा सुनते ही सेठ क्रोधित हो गया. वह सोचने लगा कि ये कैसा संत है, मैंने इसे दान दिया और ये मुझे ही ऐसा जवाब दे रहा है. सेठ ने गुस्से में संत को खूब खरी-खोटी सुना दी. कुछ देर बाद सेठ शांत हो गया, तब संत ने कहा कि जैसे ही मैंने तुम्हें कुछ अप्रिय बोला, तुम्हें गुस्सा आ गया. गुस्से में तुम मुझ पर चिल्लाने लगे, इस स्थिति में अगर मैं भी तुम पर गुस्सा हो जाता तो हमारे बीच झगड़ा हो जाता है.

संत ने सेठ को समझाया कि क्रोध ही हर झगड़े की जड़ है. अगर हम क्रोध नहीं करेंगे तो कभी वाद-विवाद होगा ही नहीं. गुस्से में काम सुधरते नहीं हैं और ज्यादा बिगड़ जाते हैं. इसीलिए क्रोध को काबू करने की कोशिश करनी चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. हमेशा धैर्य बनाए रखना चाहिए.

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