Saturday, 20 January 2024

दुनिया की भीड़ में...


कभी देखिए

भीड़ से अलग होकर

दुनिया की भीड़ को

सड़क पर बेतहाशा

दौड़ती-भागती भीड़ को

सुबह से शाम तक

बस भागती हुई भीड़ को...



हम सब भी शामिल हैं

रोज-रोज की जिंदगी के सवालों से जूझती

खट्टे-मीठे अनुभवों को संजोई

दुनिया की इसी भीड़ में

उस भीड़ में

जिसे देखकर

होता है अहसास

जिंदगी की बोझिलता का...


हम भी हैं

उसी भीड़ का हिस्सा

जो दिखाई देती है

हर चौक-चौराहों पर,

हां, शहर के रेडलाइट पर

ये कुछ ज्यादा ही होती है.


कभी नहीं रुकती ये भीड़

बस थमती है

आधी रात को

केवल एक पहर के लिए

और फिर चल पड़ती है

सुबह होते ही

उस गंतव्य की ओर

जो कहीं नहीं ले जाती उसे

बस चलाती-भटकाती जाती है

उलझाती जाती है

रोज नए-नए सवालों से...

..उफ ये भीड़




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