संस्कृत का एक श्लोक है- परिवर्तनमेव स्थिरमस्ति...
यानी परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर है. यानी आपका ब्रह्मांड और ये जीवन लगातार बदल रहा है, अगर आप इसे अपनाते हैं तो इसका मतलब है कि आप इसके साथ चल रहे हैं. यानी कि आप ब्रह्मांड के नियमों के अनुरूप खुद को ले जा पाने में सक्षम हैं.
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