Friday, 24 March 2023

लाइफ को रिफ्रेश-रिकनेक्ट करते रहें...


...लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...

जीवन है तो मुश्किलें भी हैं. लेकिन ये आप पर निर्भर करता है कि आप मुश्किलों के आगे टूटकर बिखर जाते हैं या और मजबूत होकर निखरकर उनसे उबरकर सामने आते हैं. इसके लिए आपको सीखना होगा कि हालात कैसे भी हों आपको हार नहीं मानना है. जिंदगी आजमाइशें लाएगी लेकिन इनके सामने मुस्कराते हुए डट जाने वाला ही आखिरकार विजेता बनकर उभरता है. हमारे सामने अक्सर ये सवाल होता है कि मुश्किलें आएं तो क्या करें?

डेल कार्नेगी की ये लाइनें यहां काम आएंगी-

दुनिया में अधिकांश महत्वपूर्ण चीजें उन लोगों द्वारा पूरी की गई हैं, जो तब भी प्रयास करते रहे हैं जब उन्हें कोई उम्मीद ही नहीं थी.



मतलब हालात कोई भी हों आपको लक्ष्य की ओर जुटे रहना है. आपको मुश्किलों के आगे हार नहीं मानना है बल्कि स्मार्ट तरीके से उन्हें अपने पक्ष में करने की स्किल डेवलप करनी होगी. इसे आसान शब्दों में ऐसे समझिए.

आपने मोबाइल और लैपटॉप जरूर चलाया होगा. सोचिए यदि आपका मोबाइल या लैपटॉप कुछ प्रॉब्लम करने लगे तो आप क्या करते हैं? उठे उठाकर फेंक देते हैं? नहीं! यदि आप समझदार हैं तो उसे रिफ्रेश करते हैं और वह फिर से सही से चलने लगता है. इसी प्रकार यदि आपका इंटरनेट समस्या करे तो आप उसे रिक्नेक्ट करते हैं. 

यही आपको अपने जीवन के गोल के साथ करना है. अनेकों प्रॉब्लम और फेल्योर के चलते आपका आपके गोल के साथ कनेक्शन टूटने लगता है, तब हार मत मानो बल्कि खुद को रिफ्रेश करो और अपने गोल के साथ खुद को दोबारा रिकनेक्ट करो. तब जिंदगी की पिक्चर एक बार फिर क्लियर और स्मूथ चलने लगेगी.

''मजबूत रहो, सकारात्मक रहो और कभी हार मत मानो.'' – रॉय टी. बेनेट

ये कहानी आपको प्रेरित करेगी.

''एक बार एक लड़की अपने पिता के साथ कार से कहीं जा रही थी. कार लड़की चला रही थी. अचानक रास्ते में एक भयंकर तूफ़ान आया. लड़की ने कार रोकी और पिता से पूछा अब हम क्या करें?  पिता ने जवाब दिया “कार चलाती रहो”.

लड़की कार चलाने लगी. तूफ़ान में कार चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था, तूफ़ान और भयंकर होता जा रहा था। अब मैं क्या करू? लड़की ने फिर पूछा. कार चलाती रहो, पिता ने कहा.

थोड़ा आगे जाने पर लड़की ने देखा कि रास्ते में कई वाहन तूफ़ान की वजह से रुके हुए थे. उसने फिर अपने पिता से कहा मुझे कार रोक देनी चाहिए, मैं मुश्किल से देख पा रही हूं, यह भयंकर है और प्रत्येक ने अपना वाहन रोक दिया है.

उसके पिता ने फिर निर्देशित किया, कार रोकना नहीं, बस चलाती रहो.

तूफ़ान ने बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लिया था किन्तु लड़की ने कार चलाना नहीं छोड़ा.

और अचानक ही उसने देखा कि कुछ साफ़ दिखने लगा है. कुछ दूर आगे जाने के बाद लड़की ने देखा कि तूफ़ान थम गया और सूर्य निकल आया.

अब उसके पिता ने कहा – अब तुम कार रोक सकती हो और बाहर आ सकती हो, लड़की ने पूछा पर अब क्यों?

पिता ने कहा जब तुम बाहर आओगी तो देखोगी कि जो राह में रुक गए थे, वे अभी भी तूफ़ान में फंसे हुए हैं. चूंकि तुमने कार चलाने का प्रयत्न नहीं छोड़ा, इसीलिए तुम तूफ़ान के बाहर हो.''

Sunday, 19 March 2023

आतीं न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियां

दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया।

 

Sunday, 12 March 2023

हमारी खुशी की कुंजी हमारे खुद के पास है...

किसी ने सच ही कहा है कि- अगर आप हमेशा परेशान रहते हैं तो इसका मतलब है कि आपके जीवन जीने के तरीके में जरूर कोई न कोई फॉल्ट है...

काम की मजबूरी, भागमभाग की जिंदगी, परिवार में तनाव, पारिवारिक झगड़े, डिप्रेशन, एंजाइटी, नशा... आज के आधुनिक जीवन की वो सच्चाइयां हैं जिन्हें इंसान ने अपने ऊपर इस हद तक ओढ़ लिया है कि कभी-कभी लगता है कि इनसे छुटकारा ही संभव नहीं है. लेकिन क्या यही जीवन का आखिरी सच है? या आपके पास कुछ ऐसा है जिसे आप एक्सप्लोर नहीं कर पा रहे हैं? कुछ ऐसा जो आपकी खुशियों और आपके बीच पर्दा डाले हुए है और आप उन तक पहुंच नहीं पा रहे हैं?



आज बिजी जिंदगी जी रहे इंसान के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि आनंद की तलाश कहां करें? आनंद के लिए किसके पास जाएं. क्या कोई और इंसान आपको आनंद तक पहुंचा सकता है या कोई जगह-कोई चीज आपको आनंद दे सकती है?

दरअसल, एक खुशहाल जिंदगी के लिए हमें ये बात समझनी होगी कि हमारी खुशियों की कुंजी हमारे पास ही है. खुशियों के लिए हमें सबसे पहले खुद के पास जाने की जरूरत है, खुद से जुड़ने की जरूरत है. दूसरे शब्दों में कहें तो बैक टू बेसिक का फॉर्मूला ही हमें खुशियों तक या आध्यात्मिक भाषा में कहें तो आनंद तक पहुंचा सकता है.

अगर आप खुद को, खुद के समय को, खुद के मन को और खुद के मस्तिष्क को पहले मैनेज करना सीख जाएं तो समस्याएं भी मैनेज होने लगेंगी. आपको इसमें मजा भी आने लगेगा लेकिन इसका एक प्रोसेस है जिसके लिए रोज आपको कुछ समय अपने लिए निकालना होगा. आप सोच रहे होंगे कि खुद के लिए क्या समय निकालना? सारा समय मेरा ही तो है. लेकिन ऐसा नहीं है. आप अपने रोज के समय को गौर करके देखें कि कितना समय आप खुद के ऊपर दे पाते हैं?

सबसे पहले खुद के लिए एकांत का एक समय निकालें. रोज सुबह या शाम सिर्फ 15 मिनट. जिसमें आप देखें कि आज का दिन कैसा गया. सबसे ज्यादा खुशी आपको आज किस काम को करके आया. अपने साथ-साथ रोज शाम अपने परिवार के हर सदस्य से ये सवाल भी पूछें कि आज का सबसे मजेदार मोमेंट तुम्हारा क्या रहा? देखिए जवाब से कैसी मैजिकल फीलिंग आपको आती है. इससे आपके परिवार के लोगों को भी लगेगा कि आप उनकी खुशियों की परवाह करते हैं.

आप कोई भी काम करते हों. हफ्ते में एक दिन सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिए निकालिए. अपने शहर की उन जगहों की लिस्ट बनाइए जहां आप शांति के साथ और कम खर्च में और प्राकृतिक नजारों के बीच अपना पूरा दिन बिता सकते हैं. वहां जाइए, शांति से बैठिए, परिवार के साथ बातें कीजिए, बच्चों के साथ बिल्कुल बच्चे बनकर एंजॉय कीजिए. उनके खेल में शामिल होइए...उनके साथ शांत वातावरण में बैठकर खाना खाइए.

यकीन मानिए आपमें नई ऊर्जा का संचार होने लगेगा. कुछ दिनों में सिर्फ आपको ही नहीं आपकी पूरी फैमिली को इस तरह के वीकेंड का इंतजार रहने लगेगा. हफ्ते में सिर्फ एक दिन का मैजिक न सिर्फ आपकी जिंदगी बल्कि चीजों को, और समस्याओं को देखने का आपका नजरिया भी बदल देगा.

ये प्रयोग करके देखिए. आपको आनंद की तलाश में कहीं भटकना नहीं होगा. आपके आसपास के माहौल में ही आनंद उतरता दिखेगा. ये प्रयोग शुरुआत में बस चार हफ्तों के लिए करके देखें... आप अपने और अपने परिवार के लिए मैजिकल सैटरडे, मैजिकल संडे, मैजिकल मंडे... जो भी आपके लिए संभव हो क्रिएट कर सकते हो. उस दिन को सिर्फ खुशियों के लिए डेडिकेट करके देखिए.

हमें ये सत्य समझना होगा कि जीवन बड़ा अमूल्य है. इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब हम जीवन जीने की कला को समझें. अध्यात्म को अपना दोस्त बनाइए. अध्यात्म का मतलब वो थिंकिंग जो आपको आपसे जोड़े. यह जीवन जीने की कला सिखाता है. जिन्होंने इसका महत्व समझ लिया उनके लिए यह एक दिव्य विधा है. यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है.

Wednesday, 22 February 2023

हमेशा समस्या का दूसरा पहलू खोजें...

रूस में एक कहावत है- A hammer shatters glass but forges steel.

यानी हथौड़े की चोट शीशे को तोड़ देती है लेकिन लोहे को फौलाद बना देती है.



हमारे सामने जीवन में रोज नई-नई समस्याएं आती हैं. तब हम बेहद परेशान हो जाते हैं लेकिन आपने कभी गौर किया है कि कुछ समय बाद जब हम उस समस्या से निकल चुके होते हैं तो वो पल हमें कितना आसान लगता है. आप अतीत में आए किसी मुश्किल वक्त के बारे में सोचकर देखें कि उससे आपके जीवन में कैसे बदलाव आए. क्या जिंदगी वहीं रुक गई या फिर उस मुश्किल हालात ने आपको और भी मजबूत बनाकर उभार दिया?

ये नतीजा ही बताता है कि हम शीशे के बने हैं या लोहे के? यहां विजेताओं और बीच में मैदान छोड़ जाने वालों में एक ही फर्क है कि विजेता बीच में मैदान नहीं छोड़ते. उन्हें बस एक बात पता होती है कि जीत बस आने वाली है. वो कहते हैं न कि- 'लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.'

जब मुसीबतें आती हैं तब पहाड़ की तरह लगती हैं. कई बार लगता है कि सबकुछ खत्म. लेकिन याद रखें जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता तो मुसीबतें भी कैसे स्थायी हो सकती हैं. मुश्किलें आएं तो कहां से शुरुआत करें ये सवाल आप सबके मन में उठ रहा होगा. तो उसका जवाब ये है कि मुश्किल आएं तो पहले शांत हो जाएं, एक प्लान बनाएं. जो जरूरी है उससे शुरुआत करें, फिर जो मुमकिन है वो करें, और फिर आप अचानक पाएंगे कि आप नामुमकिन काम भी करने लगे हैं.

समस्या आए तो उसके दूसरे पहलू को देखें... हल आसान हो जाएगा

मुश्किलें क्या हैं अगर आप समझ लें तो रास्ते आसान हो जाएंगे. जिंदगी हम सबको धक्के मारती है. कुछ लोग हार मान लेते हैं और बाकी के लोग लड़ते रहते हैं. हर धक्के के जरिए जिंदगी आपसे कहती है- जाग जाओ, मैं तुम्हें कुछ सीखाना चाहती हूं. कुछ लोग सबक सीख लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. वे जिंदगी के धक्कों का स्वागत करते हैं. ज्यादातर लोग छोड़ देते हैं. जो टिके रह जाते हैं मैदान में वही विजेता बनते हैं.

एक बाप-बेटे की कहानी बहुत रोचक है. पिता कोई काम करने में बिजी था. बेटा बार-बार आता और डिस्टर्ब करता. पिता परेशान हो गया और सोचा कि इसे किसी काम में उलझाया जाए. उन्होंने पास ही पड़ी एक पुरानी किताब उठाई और उसके पन्ने पलटने लगे. तभी उन्हें विश्व मानचित्र छपा दिखा , उन्होंने तेजी से वो पेज फाड़ा और बच्चे को बुलाया- देखो ये वर्ल्ड मैप है , अब मैं इसे कई पार्ट्स में कट कर देता हूं, तुम्हे इन टुकड़ों को फिर से जोड़ कर वर्ल्ड मैप तैयार करना होगा. और ऐसा कहते हुए उन्होंने ये काम बेटे को दे दिया.

बेटा तुरंत मैप बनाने में लग गया और पिता यह सोच कर खुश होने लगे की अब वो आराम से दो-तीन घंटे अपना काम कर सकेंगे. लेकिन ये क्या, अभी पांच मिनट ही बीते थे कि बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला, 'ये देखिए पिताजी मैंने मैप तैयार कर लिया है.'

पिता ने आश्चर्य से देखा , मैप बिलकुल सही था, उन्होंने पूछा- 'तुमने इतनी जल्दी मैप कैसे जोड़ दिया , ये तो बहुत मुश्किल काम था?'

बच्चे ने कहा- कहां पापा, ये तो बिलकुल आसान था , आपने जो पेज दिया था उसके पिछले हिस्से में एक कार्टून बना था , मैंने बस वो कार्टून कम्प्लीट कर दिया और मैप अपने आप ही तैयार हो गया... और ऐसा कहते हुए वो बाहर खेलने के लिए भाग गया और पिताजी सोचते रह गए.

दोस्तों लाइफ में आई प्रॉब्लम्स भी कई बार ऐसी ही होती हैं. सामने से देखने पर वो बड़ी भारी-भरकम लगती हैं , मानो उनसे पार पाना असंभव हो , लेकिन जब हम उनका दूसरा पहलु देखते हैं तो वही प्रॉबलम्स आसान बन जाती हैं, इसलिए जब कभी आपके सामने कोई समस्या आए तो उसे सिर्फ एक नजरिये से देखने की बजाय अलग-अलग दृष्टिकोण से देखिये , क्या पता वो बिलकुल आसान बन जाएं.

जब कभी जीवन में मुश्किलें आएं तो एक नई ट्रिक ट्राई करें. मुश्किल को आने दें, शांति से उसका सामना करें और सोचे कि इस वक्त क्या जरूरी है और उसे किए जाने से एक सकारात्मक बदलाव आपके जीवन में क्या आएगा. फिर उसे लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ जाएं. आप देखिएगा आपकी मुश्किलें कम होती लगेंगी. सफलता की राह साफ होने लगेगी.  

यदि असफल भी हो जाओ तो इसे एक चैलेंज के रूप में लो. यह असफलता स्थायी नहीं है बल्कि हमें बताने आती है कि कुछ कमी रह गई थी और सफलता ज्यादा दूर नहीं है. कारणों का पता करो और उसपर काम करो, बस दोबारा वो गलती नहीं दोहरानी है.

'सफल होना है कि कदम भारी रख,

बाहर निकल तूफानों से यारी रख

कदम-कदम पर मिलेंगी मुश्किलें, ये तय है

पर तू निरंतर अपना सफर जारी रख...'

Sunday, 19 February 2023

दो किस्से... जो जीवन के प्रति आपका नजरिया बदल देंगे

आज आपको दो किस्से सुनाते हैं जो बताएंगे कि आपको आगे बढ़ने के लिए, जीवन में कुछ हासिल करने के लिए प्रेरणा कहां से और कैसे लेनी हैं. आपकी अपनी सोच, आपका अपना नजरिया ही आपके अंदर स्वाभिमान भरेगा और सफलता के रास्ते पर लाएगा. आपके लिए जानना जरूरी है कि अंदरूनी प्रेरणा क्यों जरूरी है?


पहला किस्सा-

एक भिखारी चौराहे पर कलम से भरा एक कटोरा लेकर बैठा हुआ था और आने-जाने वालों से कुछ पैसे देने की गुहार लगा रहा था. एक नौजवान बिजनेसमैन वहां से गुजरा. उस नौजवान ने कटोरे में कुछ पैसे डाले और आगे बढ़ गया. कुछ कदम आगे चलकर वह वापस आया और कटोरे में से कुछ कलम उठाते हुए बोला- इसकी कीमत है...ठीक. आखिरकार तुम भी एक बिजनेसमैन हो और मैं भी. फिर वह चला गया.

एक साल बाद वह नौजवान बिजनेसमैन एक पार्टी में गया. वह भिखारी भी वहां सूट-टाई लगाए आया था. नौजवान बिजनेसमैन को पहचानकर वह भिखारी उसके पास गया और बोला- आप शायद मुझे नहीं पहचानते लेकिन मैं आपको जानता हूं और कभी भूल नहीं सकता. उसने एक साल पहले की पूरी कहानी उसे याद दिलाई. नौजवान ने कहा- अब जब तुमने याद दिलाया तो मुझे याद आया कि तुम तो एक भिखारी थे न, यहां पार्टी में सूट-बूट में क्या कर रहे हो.

भिखारी ने कहा- आप शायद नहीं जानते कि आपने मेरे लिए उस दिन क्या किया? मेरी जिंदगी में आप शायद वो पहले इंसान थे जिसने मेरा स्वाभिमान वापस लौटा दिया. आपने मेरे कटोरे से कुछ पेन उठाकर पैसे दिए और कहा कि तुम भी बिजनेसमैन हो और मैं भी. आपके जाने के बाद मैं काफी देर तक अपने बारे में सोचता रहा कि मैं यहां क्या कर रहा हूं. मैं भीख क्यों मांग रहा हूं? तभी मैंने फैसला कर लिया कि अब मैं भीख नहीं मागूंगा और कुछ बनकर दिखाऊंगा. मैंने अपना झोला बंद किया और काम करना शुरू किया और आज जो भी हूं आपके सामने हूं.

मैं सिर्फ आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि आपने मुझे मेरा खोया हुआ स्वाभिमान वापस लौटा दिया. उस घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी. यहां उस नौजवान बिजनेसमैन के कुछ शब्दों ने उस भिखारी का परिचय उसे खुद से करा दिया. वह खुद सोचता रहा, खुद के नए विचारों से प्रेरित हुआ और फिर अपनी जिंदगी बदलने की राह पर चल पड़ा. जब वह फैसला करके आगे बढ़ गया तो फिर बदलाव भला कौन रोक सकता था.

दूसरी कहानी-

दूसरी कहानी नजरिये की है. एक ही स्थिति दो लोगों के सामने होती है. एक समान हालात को कौन किस नजरिये से देखता है उसकी आगे की जिंदगी उसी के मुताबिक होती है. ये दो भाइयों की कहानी है जिनका पालन-पोषण एक ही माहौल में हुआ था लेकिन दोनों की जिंदगी में बहुत बड़ा फर्क था. इनमें से एक भाई नशे और शराब का आदी था जो अक्सर अपने परिवार वालों को मारता-पीटता था. जबकि दूसरा भाई एक कामयाब बिजनेसमैन था. समाज में उसकी इज्जत थी. उसका परिवार भी बेहद खुशहाल और संपन्न था. लोग जानना चाहते थे कि एक ही मां-बाप की संतान होने और एक ही माहौल में पलने के बावजूद इन दोनों भाइयों के स्वभाव में इतना फर्क क्यों था?

पहले भाई से लोगों ने ये बात पूछी- तुम ऐसे काम क्यों करते हो? नशे के आदी हो और शराब पीते हो. परिवार वालों को पीटते हो. इसकी प्रेरणा तुम्हें कहां से मिलती है? उसने जवाब दिया- मेरे बाप से. मेरा बाप नशेबाज है, शराबी है और परिवार वालों को पीटता है. मैंने बचपन से यही देखा है. ऐसे हालात में आप मुझसे और क्या उम्मीद करते हैं. यही तो मैं हूं.

लोग अब दूसरे भाई के पास पहुंचे. उससे भी वही सवाल पूछा और कहा- आप हर काम सही कैसे कर रहे हैं? आपको यह प्रेरणा कहां से मिलती है? सोचिए उसने क्या जवाब दिया. ''मेरे बाप से, मैं जब छोटा था और अपने बाप को शराब पीकर हर गलत काम करते, मारते-पीटते देखता था तभी मैंने फैसला कर लिया था कि मैं ऐसा नहीं बनूंगा,''

दोनो भाई अपनी शक्ति और प्रेरणा एक ही जगह से पा रहे थे. लेकिन एक ने गलत रूप में अपनाया और दूसरे ने सबक के रूप में. बस यहीं से जिंदगी में फर्क आना शुरू हो गया. आप खुद तय कर सकते हैं आप अपने जीवन में कौन सा नजरिया अपनाना चाहेंगे?

Sunday, 12 February 2023

वक्त कैसा भी हो गुजर ही जाता है...

बुरा भी आता है, भला भी आता है

ठहरता नहीं वक्त गुजर ही जाता है...


जीवन एक रहस्य है, जिसको जीना है, एंजॉय करना है. जिंदगी है तो समस्याएं तो आती ही रहेंगी लेकिन उस पर आपका रिएक्शन तय करेगा कि उसमें से आप टूटकर निकलेंगे या मुस्कराते हुए विजेता की तरह निकलेंगे. याद रखिए मुसीबतें आती हैं जीवन में परिवर्तन करने के लिए. 

उम्मीद है तो रास्ता है. हमेशा याद रखें हमारी आखिरी उम्मीद हम स्वयं हैं. और जब तक हम हैं उम्मीद कायम है. लाइफ में जब भी कोई समस्या आए तो दो चीजें याद रखें-

1. ये समस्या कोई नई समस्या नहीं है. आपसे पहले लाखों लोगों को ये समस्या आ चुकी है.

2. हजारों-हजार लोग इस समस्या से कामयाबी के साथ बाहर निकल चुके हैं.

ओशो कहते हैं-  जीवन को आनंदित होकर लेते रहो. मुश्किल समय भी आए तो गुजर ही जाएगा.

एक बड़ी प्रसिद्ध सूफी कहानी है.

एक सम्राट ने अपने सारे दरबारी लोगों और बुद्धिमानों को बुलाया और उनसे कहा– मैं कुछ ऐसा सूत्र चाहता हूं, जो छोटा हो, एक वचन में पूरा हो जाये और जो हर घड़ी में काम आए. दुख हो या सुख, जीत हो या हार, जीवन हो या मृत्यु सब में काम आये, तो तुम लोग ऐसा सूत्र खोज लाओ. बड़ी देर तक मंथन चला और कुछ हल नहीं निकला. फिर सबने राजा को सुझाया- हमने सुना है एक सूफी फकीर गांव के बाहर ठहरा है वह प्रज्ञा को उपलब्ध, संबोधी को उपलब्ध व्यक्ति है, क्यों न हम उसी के पास चलें?

लोगों ने जाकर उस सूफी फकीर को पूरी बात बताई. उसने एक अंगूठी पहन रखी थी अपनी उंगली में वह निकालकर सम्राट को दे दी और कहा– इसे पहन लो. इस पत्थर के नीचे एक छोटा सा कागज रखा है, उसमें सूत्र लिखा है, वह मेरे गुरु ने मुझे दिया था, मुझे तो जरूरत न पड़ी इसलिए मैंने अभी तक खोलकर देखा भी नहीं.

उन्होंने एक शर्त रखी थी कि जब विपरित हालात हों और कुछ भी उपाय न रह जाये, तब ही इसे खोलकर पढ़ना.

सम्राट ने अंगूठी पहन ली, वर्षों बीत गये. कई बार जिज्ञासा भी हुई. फिर सोचा कि कहीं खराब न हो जाए, फिर काफी वर्षों बाद एक युद्ध हुआ जिसमें सम्राट हार गया, और दुश्मन जीत गया. उसके राज्य को हड़प लिया. वह सम्राट एक घोड़े पर सवार होकर भागा अपनी जान बचाने के लिए. राज्य तो गया संघी, साथी, दोस्त, परिवार सब छूट गए., दो-चार सैनिक और रक्षक उसके साथ थे वे भी धीरे-धीरे हट गये क्योंकि अब कुछ बचा ही नहीं था तो रक्षा करने का भी कोई सवाल न था.

दुश्मन उस सम्राट का पीछा कर रहा था, तो सम्राट एक पहाड़ी घाटी से होकर भागा जा रहा था. उसके पीछे घोड़ों की आवाजें आ रही थीं. टापे सुनाई दे रही थी. प्राण संकट में थे, अचानक उसने पाया कि रास्ता समाप्त हो गया, आगे तो भयंकर गड्ढा है वह लौट भी नहीं सकता था, एक पल के लिए सम्राट स्तब्ध खड़ा रह गया कि क्या करें?

फिर अचानक याद आई, खोली अंगूठी, पत्थर हटाया, निकाला कागज, उसमें एक छोटा सा वचन लिखा था- 'यह वक्त भी गुजर जाएगा'.

सूत्र पढ़ते ही उस सम्राट के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई. उसके चेहरे पर एक बात का खयाल आया. सब तो बीत गया, में सम्राट न रहा, मेरा साम्राज्य गया, सुख बीत गया, जब सुख बीत जाता है तो दुख भी स्थिर नहीं हो सकता. शायद सूत्र ठीक कहता है. अब करने को कुछ भी नहीं हैं लेकिन सूत्र ने उसके भीतर कोई सोया तार छेड़ दिया. कोई साज छेड़ दिया. यह भी बीत जायेगा. ऐसा बोध होते ही जैसे सपना टूट गया. अब वह व्यग्र नहीं, बैचेन नहीं, घबराया हुआ नहीं था. वह बैठ गया.

संयोग की बात थी, थोड़ी देर तक तो घोड़े की टाप सुनायी देती रही. फिर टाप बंद हो गई. शायद सैनिक किसी दूसरे रास्ते पर मुड़ गए. घना जंगल और बिहड़ पहाड उन्हें पता नहीं चला कि सम्राट किस तरफ गया है. धीरे-धीरे घोड़ों की टाप दूर हो गयी, अंगूठी उसने वापस पहन ली.

कुछ दिनों बार दोबारा उसने अपने मित्रों को वापस इकठ्ठा कर लिया, फिर उसने वापस अपने दुश्मन पर हमला किया, पुनः जीत हासिल की, फिर अपने सिंहासन पर बैठ गया. जब सम्राट अपने सिंहासन पर बैठा तो बड़ा आनंदित हो रहा था.

तभी उसे फिर पुनः उस अंगूठी की याद आई, उसने अंगूठी खोली, कागज को पढ़ा, फिर मुस्कुराया, दोबारा सारा आनन्द विजयी का उल्लास, विजय का दंभ सब विदा हो गया. उसके वजीरों ने पूछा- आप बड़े प्रसन्न थे अब एक दम शांत हो गये क्या हुआ ?

सम्राट ने कहा- जब सभी बीत जायेगा तो इस संसार में न तो दुखी होने को कुछ है और न ही सुखी होने को कुछ है. तो जो चीज तुम्हें लगती है कि बीत जायेगी उसे याद रखना, अगर यह सूत्र पकड़ में आ जाये, तो और क्या चाहिए ? तुम्हारी पकड़ ढ़ीली होने लगेगी. तुम धीरे-धीरे अपने को उन सब चीजों से दूर पाने लगोगे जो चीजें बीत जायेगी. क्या अकड़ना, कैसा गर्व, किस बात के लिए इठलाना, सब बीत जायेगा. यह जवानी बीत जायेगी.

इसलिए जीवन में हालात जैसे भी हों साहस के साथ उसका सामना कीजिए. जो नियती है उसे स्वीकार कीजिए, बेहतर की ओर लगातार कोशिश कीजिए. कोई भी चीज आपको तब तक नहीं हरा सकती जबतक आप खुद हार को स्वीकार न कर लें. 

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर लिखते हैं-

सच है विपत्ति जब आती है

कायर को ही दहलाती है

सूरमा नहीं विचलित होते

क्षण एक नहीं धीरज खोते

विघ्नों को गले लगाते हैं

कांटों में राह बनाते हैं...

Saturday, 7 January 2023

जीवन में संतुलन क्यों जरूरी?

क्या सिर्फ पैसा जीवन में खुशियां ला सकता है? जीवन को परफेक्ट बनाने के लिए संतुलन का क्या महत्व है इसे समझने के लिए इस सच्ची कहानी को ध्यान से समझने की जरूरत है.


साल 1923 में दुनिया के नौ सबसे कामयाब वित्तदाता शिकागो के एक बड़े होटल में अर्थव्यवस्था के बारे में चर्चा करने के लिए मिले. ये नौ दुनिया के सबसे ज्यादा अमीर लोग थे. मीटिंग के लिए टेबल पर मौजूद लोगों में न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के सभाध्यक्ष... दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी के अध्यक्ष... दुनिया की सबसे बड़ी गैस कंपनी के अध्यक्ष... और दुनिया के सबसे बड़े एकाधिकार के अध्यक्ष थे.

25 साल बाद... साल 1948... आपको क्या लगता है उन नौ लोगों का क्या हुआ? जिनके पास कुछ सालों पहले तक इतनी शक्ति और दौलत थी... मगर जिंदगी में हिसाब नहीं था? संतुलन नहीं था. उनकी किस्मत का लेखा ये था...

नौ में से तीन आदमियों ने आत्महत्या कर ली. नौ में से तीन कंगाल हो गए, नौ में से दो को जेल हो गई. और नौ में एक को कानून ने पागल घोषित कर दिया. मतलब नौ में से नौ नाखुश, कंगाल, तिरस्कृत, या पागल मरे. इन नौ में से हर एक ने पैसा बनाना तो सीखा. मगर किसी ने संतुलन बनाने की महत्वता पर ध्यान नहीं दिया. किसी ने खुशहाली की बुनियाद पर ध्यान नहीं दिया.

जाहिर है सिर्फ पैसा जीवन में खुशियां नहीं दे सकता. अगर सिर्फ पैसों से खुशी खरीदी जा सकती तो बड़े-बड़े स्टार्स, कॉरपोरेट ऑफिसर्स, बिजनेसमैन डिप्रेशन, एंजाइटी के शिकार नहीं होते, अमीर लोगों की शादियों में ब्रेकअप नहीं होतें, इतनी खुदकुशियां नहीं होतीं. इसीलिए समझने की जरूरत है कि सफलता के लिए, पैसों के लिए जुनून जरूरी है लेकिन जीवन में, परिवार में संतुलन भी उतना ही जरूरी है. वरना सफलताओं का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा जीवन में.

किसी ने ठीक ही कहा है- जीवन में सबसे बड़ा हथियार है प्रेम और सबसे बड़ी पूंजी है परिवार...

कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...