हमारी खुशी की कुंजी हमारे पास ही है. हमारी समस्याओं का समाधान हमारे पास ही है. इसके लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है बल्कि खुद से खुद की पहचान कराने की जरूरत है. अपने अंदर और बाहर के तार को जोड़ने की जरूरत है. आइए Happy Science के जरिए मिलकर रास्तों को तय करते हैं, मुश्किलों को आसान बनाते हैं.
Sunday, 18 September 2022
Saturday, 17 September 2022
हर एक संकट का हल होगा...
लोहा जितना तपता है,
उतनी ही ताकत भरता है...
सोने को जितनी आग लगे
वो उतना प्रखर निखरता है
हीरे पर जितनी धार लगे
वो उतना खूब चमकता है
मिट्टी का बर्तन पकता है,
तब धुन पर खूब खनकता है
सूरज जैसा बनना है तो,
सूरज जितना जलना होगा
नदियों सा आदर पाना है तो
पर्वत छोड़ निकलना होगा
और हम आदम के बेटे हैं
क्यों सोचें राह सरल होगा
कुछ ज्यादा वक्त लगेगा पर
संघर्ष जरूर सफल होगा
हर एक संकट का हल होगा
वो आज नहीं तो कल होगा...
बस कर्म तुम्हारा कल होगा,
और कर्म में अगर सच्चाई है
तो कर्म कहां निष्फल होगा
हर एक संकट का हल होगा
आज नहीं तो कल होगा...
Thursday, 15 September 2022
हर रात के बाद सुबह है, हर मुश्किल के बाद कुछ बेहतर है...
यह शोध उन्होंने पोलैंड में किया था. वहां के हालात तो बहुत ही बुरे रहे थे. उन लोगों ने सैकड़ों लोगों को भूख से मरते देखा था, बम गिरने से शहरों को राख में तब्दील होते देखा था, लोगों को फांसी पर चढ़ते, कैदियों की यातना, परिवार के सदस्यों की हत्या/बलात्कार सब यातनाओं को झेला था. अगर वे नाजी सेना की यातना का शिकार होने से बच गए थे तो कुछ सालों बाद उन पर सोवियत ने चढ़ाई कर दी थी.
जब दाब्रोवस्की ने बचे हुए लोगों पर शोध किया तो उन्हें कुछ हैरानी भरी और कमाल की बात पता चली. काफी लोगों का मानना था कि युद्ध के अनुभव में हालांकि उन्होंने काफी दर्द और तकलीफें सही थीं, लेकिन उस अनुभव ने उन्हें बेहतर, ज्यादा जिम्मेदार और हां पहले से ज्यादा खुश रहना सिखाया था. बहुत से लोगों ने युद्ध से पहले के अपने जीवन को अलग बताया था. वे किसी की तारीफ नहीं करते थे, किसी से खुश नहीं थे, आलसी थे और छोटी-छोटी समस्याओं में घिरे रहते थे.
युद्ध के बाद उनमें एक विश्वास आया. वे खुद को लेकर ज्यादा निश्चित हो पाए. हर चीज का शुक्रिया करने लगे और अब छोटी-छोटी समस्याएं उन्हें परेशान नहीं करती थीं.
यकीनन युद्ध के उनके अनुभव भयानक रहे थे, और वे पीड़ित उनकी वजह से बिल्कुल भी खुश नहीं थे. बहुत से दिलों के जख्म अभी भी ताजा थे. लेकिन कुछ ने उन जख्मों का इस्तेमाल अपनी जिंदगी में शक्तिशाली तरीके से कर लिया था. इस परिवर्तन में वे अकेले नहीं थे. हममें से बहुत से लोग मुश्किल समय में अपना बेस्ट शॉट दे पाते हैं. हमारा दर्द अक्सर हमें मजबूत करता है, हमें ज्यादा लचीला और ज्यादा स्थिर बनाता है.
Saturday, 25 June 2022
बूंदों को छोड़ो, समुद्र बनो...
इंसान के विचार ही उसकी दुनिया का निर्माण करते हैं. आपके सुख-दुख, आपकी शांति-अशांति सब आप पर निर्भर करती है. अगर आपने इन सबके लिए खुद को जिम्मेदार मानना शुरू कर दिया तो आपकी जिंदगी की कमान आपके हाथ में होगी और उसी वक्त से आपके आसपास सब कुछ बदलना शुरू हो जाएगा.
लोगों के मन में अक्सर ये सवाल आता है कि बदलावों की शुरुआत कहां से करें? सबसे पहले तो हारने की चिंताएं छोड़ो क्योंकि इस दुनिया में न तो आप कुछ लेकर आए हो और न हीं कुछ लेकर जाओगे. कल सुबह आपका कैसा होगा आपको नहीं पता तो क्यों नहीं खुलकर जिंदगी की पारी खेल ली जाए. बस ये एटीट्यूड लाने की सबसे पहले जरूरत है.
आपके अंदर सकारात्मक बदलाव हों इसके लिए आपका स्वयं के साथ वार्तालाप करना बहुत जरूरी है. तभी आप पता लगा सकोगे कि वास्तव में आप कौन हो. आपको अपने जीवन से क्या चाहिए? आपके भविष्य की दिशा क्या होनी चाहिए. आपको इसके लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है और इस राह में चुनौतियां क्या-क्या हैं?
सही दिशा में बढ़ने के लिए जरूरी है कि मन को पहले इसके लिए तैयार किया जाए. मन को इसके लिए तैयार करने के लिए उसे भरपूर डोज की जरूरत होती है. ये कैसे होगा? अच्छी जगहों, अच्छी किताबों, अच्छे लोगों और एकांत में खुद से दोस्ती करके देखो, यहीं से बदलावों की एक श्रृंखला सी चल पड़ेगी. कभी खुद को किसी से कम मत समझो, किसी से खुद को कंपेयर मत करो.
एक मनुष्य के रूप में आत्मविकास करना आपका सबसे बड़ा लक्ष्य है. उसी दिशा में बस काम करते जाना है. अपने काम, अपने जीवन, परिवार और समाज में सहृदयता के साथ आगे बढ़ो. जो आपकी इस सकारात्मक यात्रा में साझेदार बनने योग्य हैं एक-एक कर कारवें में जुड़ते चले जाएंगे. लेकिन आपको पहले साहस करना होगा एक राह बनाने के लिए, उसपर अकेले चलने के लिए और किसी भी हद जाकर सफलता को हासिल करने के लिए. आपकी छोटी-छोटी आदतें बदलती जाएंगी और फिर एक ऐसी पर्सनैलिटी की निर्माण होगा जो अविजित होगा...
वो कहते हैं न- When you become fearless, life becomes limitless...
Saturday, 18 June 2022
दुनिया की भीड़ में...
भीड़ से अलग होकर
दुनिया की भीड़ को
सड़क पर बेतहाशा
दौड़ती-भागती भीड़ को
सुबह से शाम तक
बस भागती हुई भीड़ को...
हम सब भी शामिल हैं
रोज-रोज की जिंदगी के सवालों से जूझती
खट्टे-मीठे अनुभवों को संजोई
दुनिया की इसी भीड़ में
उस भीड़ में
जिसे देखकर
होता है अहसास
जिंदगी की बोझिलता का...
हम भी हैं
उसी भीड़ का हिस्सा
जो दिखाई देती है
हर चौक-चौराहों पर,
हां, शहर के रेडलाइट पर
ये कुछ ज्यादा ही होती है.
कभी नहीं रुकती ये भीड़
बस थमती है
आधी रात को
केवल एक पहर के लिए
और फिर चल पड़ती है
सुबह होते ही
उस गंतव्य की ओर
जो कहीं नहीं ले जाती उसे
बस चलाती-भटकाती जाती है
उलझाती जाती है
रोज नए-नए सवालों से...
...उफ ये भीड़
कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...
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बड़े विद्वान कह गए हैं- 'वाणी चांदी है, मौन स्वर्ण है'. जीवन में इसका संतुलन न केवल आपके मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जर...
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हम इंसान अक्सर जीवन में नयापन की तलाश में लगे रहते हैं. इस दौरान हम कई चीजों से होकर गुजरते हैं. कुछ चीजें और आदतें हमारे साथ हो लेती हैं और...
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कई बार हमें लगता है कि हमारी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, हम मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं, हमारी प्रगति की स्पीड दूसरों की तुलना में कम ह...





