Saturday, 17 February 2024


इस संसार में हर वस्तु की एक विशेष ऋतु और हर काम का एक समय होता है...

-सोलोमन, बाइबिल

Sunday, 4 February 2024

 

बेंजामिन फ्रैंकलिन लिखते हैं- हालात कैसे भी हों, हममें से हरेक साहस, कठोर परिश्रम और होशियारी के बलबूते पर अपने जन्म की परिस्थितियों से ऊपर उठ सकता है. इसके लिए कुछ खूबियों की जरूरत होती है- आत्मनिर्भरता, अपने को लगातार परिष्कृत करना और बिना हिचके खतरे उठाना.

Sunday, 28 January 2024

परिवर्तन प्रकृति का नियम है...

इंसान का जीवन परिवर्तनों का एक वो सिलसिला है जो उसे आने वाली नियती के लिए तैयार करता है, उसे हर परिस्थिति में एक जैसा बने रहने के लिए प्रेरित करता है और फिर मंजिल पर पहुंचकर ठोस टिके रहने के काबिल बनाता है.


भगवदगीता में लिखा है- परिवर्तन प्रकृति का नियम है. इस दुनिया में सबकुछ नश्वर है, केवल परिवर्तन ही स्थायी है. यह जानने के बावजूद कि हमारी भावनाएं, शरीर, धारणाएं और बाकी सब कुछ परिवर्तन की स्थिति में हैं, फिर भी हम इंसान किसी भी बदलाव को स्वीकार करने में अनिच्छुक हैं.

दरअसल, हम इंसान किसी भी बदलाव को लेकर सहज नहीं हैं और इसका विरोध करते हैं. हमारा समूचा जीवन परिवर्तनों से जूझते हुए बितता है. भगवदगीता इस बात पर जोर देती है कि लोगों को सफलता प्राप्त करने के लिए परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की आवश्यकता है. उन्हें नए अनुभव प्राप्त करने के लिए नवप्रवर्तन करना चाहिए, अन्वेषण करना चाहिए, नए विचारों और समाधानों के साथ आना चाहिए, जोखिम उठाना चाहिए और परिवर्तनों को स्वीकार करना चाहिए. यही आगे बढ़ने का और सफलता हासिल करने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है.

भगवदगीता का अध्याय 18, श्लोक 46 कहता है-

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।

स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।।


यानी,

हर किसी के जीवन में एक अनोखा रास्ता और उद्देश्य होता है जिसका उन्हें पालन करना चाहिए. अपने कर्तव्यों का पालन लगन और निष्ठा से करना महत्वपूर्ण है.

हम अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित करके और दूसरों से अपनी तुलना न करके सफलता प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा, यह हमें दिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, समर्पण और भक्ति आवश्यक है. अपने धर्म में आस्था और जीवन में अनुशासन कोई पिछड़ेपन की निशानी नहीं है बल्कि असल धर्म वही है जो आपको सही रास्ता दिखाए और कर्मक्षेत्र की ओर ले जाए.

Saturday, 20 January 2024

दुनिया की भीड़ में...


कभी देखिए

भीड़ से अलग होकर

दुनिया की भीड़ को

सड़क पर बेतहाशा

दौड़ती-भागती भीड़ को

सुबह से शाम तक

बस भागती हुई भीड़ को...



हम सब भी शामिल हैं

रोज-रोज की जिंदगी के सवालों से जूझती

खट्टे-मीठे अनुभवों को संजोई

दुनिया की इसी भीड़ में

उस भीड़ में

जिसे देखकर

होता है अहसास

जिंदगी की बोझिलता का...


हम भी हैं

उसी भीड़ का हिस्सा

जो दिखाई देती है

हर चौक-चौराहों पर,

हां, शहर के रेडलाइट पर

ये कुछ ज्यादा ही होती है.


कभी नहीं रुकती ये भीड़

बस थमती है

आधी रात को

केवल एक पहर के लिए

और फिर चल पड़ती है

सुबह होते ही

उस गंतव्य की ओर

जो कहीं नहीं ले जाती उसे

बस चलाती-भटकाती जाती है

उलझाती जाती है

रोज नए-नए सवालों से...

..उफ ये भीड़




Saturday, 13 January 2024

जस्ट चिल... जिंदगी में भागकर जाना कहां है?

हममें से 90 फीसदी लोगों की जिंदगी घड़ी की सुइयों के हिसाब से चलती है. खासकर शहरों में रहने वाले लोगों, खासकर कॉरपोरेट जिंदगी का प्रेशर जी रहे लोगों की. हम हर सुबह अलार्म की शोर के साथ जगते हैं, दिनभर भागदौड़ वाली जिंदगी जीते हैं और फिर रात को अगली सुबह का अलार्म सेट करने के साथ अपने दिन को विराम देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इस भागदौड़ वाली रूटीन में आपके लिए ठहरकर जिंदगी को देखने का कोई मोमेंट निकल पा रहा है क्या?



आखिर इतनी भागदौड़ क्यों? क्या ईश्वर ने आपको जिंदगी ऐसे मशीन बनकर जीने के लिए दी है? क्या आप जीवन में सुकून के कुछ पल निकाल पा रहे हैं, क्या आप जीवन में कुछ पल ठहरकर खुद के बारे में सोच पा रहे हैं? ये जानना उतना ही जरूरी है जितना आपका रोज अपनी गाड़ी में चक्के की हवा, तेल, गैस, इंजन ऑयल चेक करना... तभी आप अगली सुबह के लिए खुद को तैयार कर पाएंगे. और ये तभी संभव होगा जब आप रोज कुछ पल खुद को ठहराकर खुद से कह पाएंगे- जस्ट चिल...यानी बस कुछ पल ठहर जा भाई.

आप ये सोच रहे होंगे कि जीवन में इतने काम है, कैसे खुद को ठहरा लें, कैसे रुक जाएं? लेकिन आपके काम की एक सीमा तो होनी चाहिए न. आप जो काम कर रहे हैं वे अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए ही कर रहे हैं न? न कि जीवन को काम पर खर्च करने का ठेका लिया है आपने. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि काम भी जरूरी है लेकिन भागदौड़ ही सबकुछ तो नहीं है. जीवन को जीया नहीं तो फिर आपके हाथ आएगा क्या?

आध्यात्मिक गुरु ओशो अपने प्रवचनों के दौरान अक्सर एक किस्सा सुनाया करते थे... ये किस्सा था विश्वविजेता सिकंदर के आखिरी क्षणों का... 

'सिकंदर मरा और जिस राजधानी में मरा, उसकी अरथी निकाली गई तो मरने के पहले उसने अपने मित्रों से कहा, मेरे दोनों हाथ अरथी के बाहर लटके रहने देना. मित्रों ने कहा - 'पागल हो गए हैं आप? अरथी के भीतर हाथ होते हैं सदा, बाहर नहीं होते."

सिकंदर ने कहा - 'मेरी इतनी इच्छा पूरी कर देना हालांकि जीवन में मेरी कोई इच्छा पूरी नहीं हो पाई है. मर कर तुम कम से कम मेरी इतनी इच्छा पूरी कर देना कि मेरे दोनों हाथ बाहर लटके रहने देना."

मरे हुए आदमी की इच्छा पूरी करनी पड़ी. उसके दोनों हाथ बाहर लटके हुए थे. जब उसकी अरथी निकली तो लाखों लोग देखने आए थे. हर आदमी यही पूछने लगा कि अरथी के बाहर हाथ क्यों लटके हैं? कोई भूल-चूक हो गई है. हर आदमी यही पूछ रहा था. सांझ होते-होते लोगों को पता चला, भूल नहीं हुई है. सिकंदर ने मरने के पहले कहा था कि मेरा हाथ बाहर लटके रहने देना.  मैं लोगों को दिखा देना चाहता हूं कि मैं भी खाली हाथ जा रहा हूं. जो पाने की कोशिश की थी, वह नहीं पा सका हूं. मेरे दोनों हाथ खाली हैं, यह लोग देख लें. कोई नहीं पा सका. इस दुनिया में सब खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाते हैं.

जीवन में पैसे कमाने की भी एक सीमा है. पैसा जिंदगी के लिए सबसे जरूरी है लेकिन वही सबकुछ नहीं है. दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो अरबों रुपये कमा चुके हैं लेकिन आनंद और चैन की जिंदगी पाने के लिए तरस है. शहरी जिंदगी में तनाव, डिप्रेशन, इंजाइटी जैसी नई तरह बीमारियां लोगों का जीवन छीन रही हैं. लाखों लोग इनके शिकार हो रहे हैं, कोई इलाज में अपनी जिंदगी खपा रहा है तो कोई परेशान होकर आत्महत्या के रास्ते पर बढ़ जाता है. इन सब स्थितियों से पार पाने के लिए अध्यात्म की ताकत जरूरी है. जीवन में संतुलन के महत्व को समझना और अपनाना जरूरी है.

इसलिए जीवन में चुनौतियों और लक्ष्यों के साथ-साथ सुकून और आनंद को भी सहज भाव में लेना जरूरी है. भगवदगीता में श्रीकृष्ण कहते हैं- जीवन विपरीत ध्रुवों का संगम है, अपोजिट पोलेरेटीज का. यहां प्रत्येक चीज अपने विपरीत के साथ मौजूद है; अन्यथा संभव भी नहीं है. अंधेरा है, तो साथ में जुड़ा हुआ प्रकाश है. जन्म है, तो साथ में जुड़ी हुई मृत्यु है. जो विपरीत हैं, वे सदा साथ मौजूद हैं. सबको सहज रूप में जीना ही जीवन का सच्चा आनंद है, सच्चा संतुलन है.

नथिंगनेस ऑफ मनी की एक पहेली है. पहेली कुछ यूं है- अमीरों को वह चाहिए होता है, गरीबों के पास वह होता है, अगर तुम उसे खाओ, तो मर जाओ. और जब तुम मरते हो, तो उसे साथ ले जाते हो. वह क्या है? इस पहेली का जवाब है- कुछ नहीं! यानी अमीरों को ‘कुछ नहीं’ चाहिए होता. गरीबों के पास ‘कुछ नहीं’ होता. अगर तुम ‘कुछ नहीं’ खाओ, तो तुम मर जाते हो और जब तुम मरते हो तो अपने साथ ‘कुछ नहीं’ ले जाते हो.

जो लोग जीवन के इन रहस्यों को समझ जाते हैं वे संतुलित जीवन अपना लेते हैं. कई लोग सफलता की ऊंचाइयों को हासिल करने के साथ-साथ जीवन की सहजता को नहीं खोते. पश्चिमी समाजों में बड़ी संख्या में लोग कारोबारी सफलता पाने के बाद अध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ जाते हैं. हमारी संस्कृति में भी कर्मयोग के साथ-साथ ध्यानयोग की व्याख्या इसी का रूप है. यानी कर्म के साथ योगी का कल्चर हमें जीवन में संतुलन का महत्व समझाता है.

एक इंडियन कारोबारी हैं श्रीधर वेम्बू. भारत के अरबपत‍ियों की सूची में 55वें नंबर पर हैं, आईटी क्षेत्र में सफल हैं, अपनी मल्टीनेशनल कंपनी चलाते हैं, दुनिया भर में दफ्तर हैं, हजारों कर्मचारी हैं,  18000 करोड़ की संपत्ति के माल‍िक हैं. लेकिन अमेरिका के चमकते शहर छोड़कर इंडिया के अपने गांव लौट आए. आज वह चेन्‍नई के पास स्थि‍त अपने छोटे से गांव में रहते हैं. साइक‍िल से चलते हैं. बच्‍चों को पढ़ाते हैं. मस्त अंदाज में अपने गांव में घुमते हुए कहीं पेड़ों की छांव में लैपटॉप लेकर बैठे करोड़ों-अरबों की बिजनेस मीटिंग निपटाते कहीं भी मिल सकते हैं.

संदेश साफ है कि आपकी जिंदगी आपको आनंदित करने के लिए होनी चाहिए न कि आपको मशीन बनाने के लिए. जॉन एलिया ने अपनी शायरी में इसे दो टूक अंदाज में समझाया है-

'ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को 

अपने अंदाज़ से गँवाने का...'

Saturday, 4 November 2023

कैसा जीवन जीएं? 5 HAPPINESS MANTRA

हम सबके मन में अक्सर ये सवाल आता है कि जीवन को कैसे जिया जाए. क्या किया जाए जिससे जीवन सार्थक बन सके. खोखलेपन और दिखावे की जिंदगी से मुक्ति और आनंदित जीवन जीने के लिए आप ये 5 मंत्र अपना सकते हैं. इन तरीकों से आप अपने रोज के जीवन को न केवल सार्थक बना सकते हैं बल्कि खुद के लिए भी हमेशा आनंदित रहने का रास्ता तैयार कर सकते हैं-


1. खुद पर रोज काम करें. अपने दिमाग को रोज लर्निंग कराएं ताकि वह न केवल आपके काम के फील्ड में आपको मजबूत बनाए बल्कि दुनियादारी सीखने में मदद करे और किताबों के जरिए दूसरे महनतकश और सफल लोगों की जिंदगी के अनुभवों का आप अपनी जिंदगी में लाभ उठा पाएं. टॉप निवेशक वॉरेन बफेट और टेक्नोक्रेट बिल गैट्स जैसे लोग साल में 80 किताबें तक पढ़ जाते हैं. रोज सोने से पहले कुछ पन्ने जरूर पढ़ने की आदत पालें और वो भी ऐसी किताबों की जो आपको कुछ न कुछ अच्छा सीखा जाए.

2. आगे बढ़कर पैसे कमाएं. पैसा कमाना कोई गुनाह नहीं है जैसा कि ज्यादातक लोग बोलते नजर आते हैं. दरअसल बिना पैसे के इस धरती पर आप कोई भी काम नहीं कर सकते. अपनी या अपने परिवार की कोई भी जरूरत पूरी नहीं कर सकते. आप कोई भी काम करते हों उसमें आपकी मेहनत बहुत मायने रखती है लेकिन केवल एक फील्ड में खुद को बांधकर रखना अपने कदम रोकने जैसा है. आप रोजी-रोटी वाला अपना काम करते रहें लेकिन रोज कम से कम एक-डेढ़ घंटा अपने दूसरे काम पर भी दें. जिसमें आपकी हॉबी, निवेश, पैशन को कमर्शियल तरीके से जमीन पर उतारने जैसे काम शामिल हों. इस तरह से रोज कुछ समय देकर आप इनकम का एक दूसरा रास्ता भी बना सकते हैं.

3. आपकी हेल्थ आपकी जिम्मेदारी है. स्वास्थ्य की समस्याएं किसी के जीवन में आ सकती हैं उसे रोका नहीं जा सकता लेकिन अच्छा स्वास्थ्य रहे इसके लिए नियमित रूप से व्यायाम, टहलने, अच्छा और संतुलित खाना खाने जैसी छोटी-छोटी कोशिशें तो आप कर ही सकते हैं. क्योंकि ये काम आपको खुद के लिए करना है. डॉक्टर आपके बुखार की दवा दे सकता है लेकिन आपके मोटे होने की बीमारी का वो क्या ही इलाज करेगा. इसे नियंत्रण में लाने के लिए आपको ही अपनी आदतें बदलनी होंगी.

4. जितना आपका स्वस्थ रहना जरूरी है उतना ही आपका डिसिप्लिन में रहना भी जरूरी है. नशे की आदत, स्मोकिंग-शराब, देर रात की पार्टियां बहुत तेजी से इंसान को लुभाती हैं खासकर टीन एज में. लेकिन आपको पता होना चाहिए कि बाद में यही बुरी आदतें एंजाइटी, डिप्रेशन जैसे बुरे रिटर्न गिफ्ट भी देती हैं. और बहुत ही कम लोग होते हैं जो ऐसी आदतें एक बार पल जाने के बाद उनसे मुक्ति पाने में सफल हो पाते हैं. आज से शहरी जीवन में तनाव-डिप्रेशन-एंजाइटी के मरीजों को काउंसलिंग के नाम पर हजारों और लाखों रुपये की फीस हर महीने काउंसलर्स और साइकोथेरेपी के लिए देने पड़ते हैं यानी ऐसे एक्सपर्ट जो आपके मन को बुरे प्रभावों से मुक्ति दिलाते हैं. इसलिए आपकी बेहतर आदतों के लिए आपका डिसिप्लिन में होना खुद आपकी अपनी बेहतरी के लिए बहुत जरूरी है.

5. और आखिरकार गुडविल भी जीवन के लिए उतनी ही जरूरी है जितना आपकी अपनी प्रगति. आप दूसरों के लिए एटीएम मशीन न बनें, दूसरों के शिकार न बनें लेकिन सोच अच्छी रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए छोटी-छोटी उदारता जरूर दिखा सकते हैं. पैसे से न सही तो विचार और छोटी-छोटी मदद करके भी आप गुडविल अर्न कर सकते हैं. जैसे ट्रैफिक में फंसे बुजुर्गों को सड़क पार कराके, विकलांग लोगों के लिए रास्ता छोड़कर या उनकी ओर मदद के हाथ बढ़ाकर, या किसी बुजुर्ग जरूरतमंद या सड़क पर रह रहे बच्चों को खाना खिलाकर, उनका त्योहार अच्छा बनाकर आज अपने दिल को गुडविल का गिफ्ट कर सकते हैं. ये ईश्वर की सेवा के बराबर है.

भीड़ में भी अकेला क्यों ये मन...?

एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले एक युवा ने बड़े लक्ष्य हासिल करने की ठान ली. उसने उस पर शांति से काम शुरू कर दिया. लेकिन जैसे-जैसे उसके सपनों के बारे में लोगों को पता लगता लोग उससे दूर होते जाते. लोग साथ देना तो दूर, उसे पागल तक कहने लगे. लेकिन वह अपने लक्ष्य पर लगातार काम करता रहा. कई साल बीत गए. वह काफी सफल हो गया.


अब उसके आसपास भीड़ भी काफी रहने लगी. पहले परिवार और रिश्तेदारी के जो लोग उससे दूर रहते थे वे भी अचानक करीब दिखने लगे और अपनापन दिखाने लगे... वह शख्स सबको सहज भाव से एकसमान हैंडल करता रहा. हमेशा उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैरती रहती, जुबां पर एक मौन, अपने काम के प्रति जुनून और सबके प्रति एक जैसा उदार और सहज भाव...

एक दिन उसके बचपन के एक दोस्त ने उससे पूछा- तुम्हें बुरा नहीं लगता कि ये वही सारे लोग हैं जो कभी तुम्हारें सपनों का मजाक उड़ाते थे, तुम्हारी कोशिशों को रोकने की कोशिशें किया करते थे. आज कैसे उनके अपनेपन को तुम मुस्कराकर सहज रहकर स्वीकार कर लेते हो?

उस शख्स का जवाब सुनकर आप हैरान हो जाएंगे-

'मैं सिर्फ वही सुनता हूं जिससे मेरे इरादे मजबूत होते हैं... उन मुश्किल वक्त और अपनों के रवैये ने मुझे एक बात सिखा दी है कि अपना-पराया कोई नहीं होता सब सफलता होती है. वही लोगों को आपके पास लाती है और वही दूर करती है. आज जो आपके करीब है वो कल सफलता छीनने पर दूर भी चले जाएंगे और फिर सफलता के वापस आने पर वापस भी आ जाएंगे. आपको सिर्फ अपने ऊपर काम करते रहने की जरूरत है... हमेशा शांति से आगे बढ़ते रहें, रोज अपना नया वर्जन गढ़ने में जुटे रहें. वक्त भी बदलेगा और लोग भी.'

जिंदगी में ये सबक हम सबके काम की है. लोग और चीजें नहीं अगर आपके जीवन में कोई चीज मायने रखती है तो वो केवल आपकी अपनी सफलता है. हां, इस दौरान कई बार मुश्किलें आपको परेशान करती हैं. लेकिन यकीन मानिए इन मुश्किलों के पार ही सफलता है. ये मुश्किलें बार-बार आएंगी लेकिन यही आपको मंजिल तक भी पहुंचाएंगी.

जानकार कहते हैं कि जिंदगी में कभी भी पासा पलट सकता है लेकिन ये समझना भी जरूरी है कि पासा उसी का पलट सकता है जो गेम में बना रहे और गेम में बने रहने के लिए आपको लगातार खुद पर काम करना होगा, नए-नए रास्ते खोजने होंगे, उनपर प्रयोग करने होंगे. असफलताएं भी आएंगी, लोगों का उसपर रिएक्शन भी बदलेगा. लेकिन उनसे लगातार सीखते रहना होगा... अच्छे-बुरे वक्त के ये सबक ही आपके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं.

कृष्ण से बड़ा कोई पूर्ण पुरुष नहीं. बचपन जिया तो ऐसा कि हरेक मां ने अपने बेटे को कन्हैया कहना शुरू कर दिया, जवानी जी तो ऐसी कि प्रेम की मिसा...